वृंदा करात

वृंदा करात

 

वृंदा करात, बृंदा करात(जन्म-17 अक्टूबर 1947) भारत की एक कम्युनिस्ट राजनेता हैं। उन्हेंभारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी) की सदस्य के तौर पर 11 अप्रैल 2005 कोपश्चिम बंगाल सेराज्यसभा के लिये चुना गया। सुश्री करात 2005 में माकपा पोलित ब्यूरो की पहली महिला सदस्य के तौर पर चुनी गईं। वहभारत की जनवादी महिला समितिएडवाकी 1993 से 2004 तक महासचिव भी रह चुकी हैं और इसके बाद से एडवा के उपाध्यक्ष पद पर कार्यरत हैं।

 

जीवन परिचय

 

वृंदा करात का जन्मकलकत्ता में हुआ था। उनके पिता सूरज लाल दासलाहौर के रहने वाले थे। वृंदा ने पांच वर्ष की उम्र में अपनी माता अश्रुकोनामित्रा को खो दिया था। वृंदा की दो बहनें और एक भाई है। वृंदा नेदेहरादून के विल्‍हम गर्ल्स स्कूल से शुरुआती शिक्षा प्राप्त की है। उन्होंने 16 वर्ष की उम्र में डिप्लोमा प्राप्त करने के लियेदिल्ली विश्वविद्यालय के मिरांडा हाउस कालेज में दाखिला लिया। इसके बाद वर्ष 1971 में इतिहासमें स्नातक की पढाई करने के लिये उन्होंने देहरादून विश्वविद्यालय मेंदाखिला लिया।

 

राजनीतिक कैरियर

 

वृंदा 1967 मेंलंदन रवाना हो गयीं जहां उन्होंने चार वर्षों तकएयर इंडिया के साथ काम किया। इस दौरान उन्होंने विमान परिचायिकाओं पर स्कर्ट पहनने केलिये डाले जाने वाले दबाव के खिलाफ संघर्ष किया और इस तरह से उनकेराजनीतिक जीवन की शुरुआत हुई। लंदन में रहते हुये उनका जुडाव साम्राज्यवादविरोधी और युद्ध विरोधी आंदोलनों के साथ हुआ और वहमार्क्सवादी विचारधारा के करीब आईं। इसके बाद उन्होंने भारत की जनता के लिये काम करनेके इरादे से स्वदेश लौटने का इरादा किया। वह 1971 में अपनी नौकरी सेइस्तीफा देकर कलकत्ता लौट आईं और बीटी रंदीवे के मार्गदर्शन में माकपा मेंशामिल हुईं। इसके बाद उन्होंने राजनीति को करीब से समझने के इरादे सेकलकत्ता विश्वविद्यालय में दाखिला लिया। उन्‍होंने शुरुआती दिनों में अपनेकालेज के छात्रों के बीच औरबंगलादेश युद्ध के समय में रिफ्यूजी कैंपों में काम किया। वह 1975 मेंदिल्ली चली गईं और उत्‍तरी दिल्ली की एक कपडा मिल में काम करने वाले मजदूरों केबीच एक ट्रेड यूनियन कार्यकर्ता के तौर पर काम करना शुरु कर दिया। वह धीरेधीरे श्रमजीवी और महिला आंदोलनों में सक्रिय हो गयीं। उन्होंने बलात्कारकानूनों को लेकर 1980 में एक बडा आंदोलन छेडा। वह मौजूदा समय में भी एडवाकी उपाध्यक्ष होने के नाते महिलाओं से जुडे मुद्दों पर जागरुकता बढाने केलिये सक्रियता से काम करती हैं। वृंदा 11 अप्रैल 2005 को भारतीय संसद केऊपरी सदन राज्यसभा के लिये निर्वाचित हुईं। इसी वर्ष वह माकपा पोलित ब्यूरोकी सदस्या निर्वाचित हुईं।

 

परिवार

 

वृंदा ने अपने जीवनसाथी के तौर पर माकपा के मौजूदा महासचिव और अपने छात्र जीवन के साथीप्रकाश करात को चुना था। उनकी बहन राधिका राय का विवाह एनडीटीवी समाचार चैनल के मुख्य अधिशासीप्रणय राय से हुआ है। वृंदा 1984 के सिख दंगों पर बनी फिल्मअमुमें सोनाली बोसकोंकणा सेन शर्मा की मां की भूमिका निभा चुकी हैं।

 

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