कैप्टन विक्रम बत्रा : कारगिल का शेर

1999 के कारगिल युद्ध में श्रीनगर-लेह मार्ग के ठीक ऊपर सबसे महत्त्वपूर्ण 5140चोटी को पाकिस्तानी सेना से मुक्त कराने का जिम्मा कैप्टन विक्रम बत्रा को दिया गया था . बेहद दुर्गम क्षेत्र होने के बावजूद विक्रम बत्रा ने अपने साथियों के साथ 20 जून 1999 को सुबह 3 बजकर 30 मिनट पर इस चोटी को अपने कब्जे में ले लिया.

विक्रम बत्रा ने जब इस चोटी से रेडियो के जरिए अपना विजय उद्घोष यह दिल मांगे मोर कहा तो पूरा भारत खुशी से झूम उठा. उनकी बहादुरी के लिए उन्हें कारगिल का शेर और शेरशाह“ की भी संज्ञा दी गई. अगले दिन चोटी5140 में भारतीय झंडे के साथ विक्रम बत्रा और उनकी टीम का फोटो अखबारों में आया तो हर कोई उनका दीवाना हो गया . इसके बाद सेना ने  चोटी4875 “ को भी कब्जे में लेने का अभियान शुरू कर दिया. इसकी भी बागडोर विक्रम को सौंपी गई. उन्होंने जान की परवाह न करते हुए कई पाकिस्तानी सैनिकों को मौत के घाट उतारा.

कैप्टन विक्रम बत्रा का जन्म 9 सितम्बर 1974 को पालमपुर,( हिमाचल प्रदेश ) में हुआ था. उनके पिता का नाम जी.एल. बत्रा और माता का नाम कमलकांता बत्रा है. उन्हें प्रारंभिक शिक्षा के लिए पालमपुर के सेंट्रल स्कूल  में दाखिल करवाया गया. सेना छावनी में स्कूल होने से सेना के अनुशासन और पिता के देश प्रेम की कहानियों से विक्रम में बचपन से ही देश प्रेम प्रबल हो उठा. विक्रम अव्वल दर्जे के खिलाड़ी थे.  वे सांस्कृतिक कार्यक्रमों में भी बढ़-चढ़कर भाग लेते थे. डीएवी कॉलेज चंडीगढ़ में विज्ञान विषय में स्नातक की पढ़ाई के  दौरान वे एनसीसी के सर्वश्रेष्ठ कैडेट चुने गए और उन्होंने गणतंत्र दिवस की परेड में भी भाग लिया. विक्रम ने सेना में जाने के लिए हांगकांग में भारी वेतन वाले मर्चेन्ट नेवी के नौकरी को ठुकरा दिया.

जुलाई 1996 में उन्होंने भारतीय सेना अकादमी देहरादून में प्रवेश लिया. दिसंबर 1997 में शिक्षा समाप्त होने पर उन्हें 6 दिसंबर 1997 को जम्मू के सोपोर नामक स्थान पर सेना की 13 जम्मू-कश्मीर राइफल्स में लेफ्टिनेंट के पद पर नियुक्ति मिली. उन्होंने 1999 में कमांडो ट्रेनिंग के साथ कई प्रशिक्षण भी लिए. 1 जून 1999 को उनकी टुकड़ी को कारगिल युद्ध में भेजा गया.

कारगिल युद्ध लगभग पूरा हो चुका था, इसी दौरान कैप्टन बत्रा को अपने कनिष्ठ अधिकारी लेफ्टीनेंट नवीन को बचाने के दौरान छाती में गोली लगी और वे “जय माता दी” कहते हुये वीरगति को प्राप्त हुये.

7 जुलाई 1999 को भारत माँ का यह वीर सपूत वीरगति को प्राप्त हुआ. अदम्य साहस और पराक्रम के लिए कैप्टन विक्रम बत्रा को मरणोपरांत 15 अगस्त 1999 को परमवीर चक्र से सम्मानित किया गया.

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