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भुखमरी से ज्यादा मौतें मोटापे की वजह से हो रही है। इस सर्वे को अभी तक के सबसे बड़े स्वास्थ्य अध्ययनों में से एक बताया जा रहा है। 
 
 
सर्वे में 2010 में हुई मौतों  के  कारणों का विश्लेषण किया गया और फिर उनकी तुलना बीस साल पहले जुटाए गए आंकड़ों से की गई। 20 साल पहले पोषण का अभाव बीमारियों का मुख्य कारण होता था।
 
 
अध्ययन में पता चला है कि 2010 में दुनिया में मोटापे के कारण 30 लाख से ज्यादा मौतें हुईं जो कुपोषण से हुई मौतों से तीन गुना ज्यादा है। हालांकि रिपोर्ट कहती है कि अफ्रीका में कुपोषण अब भी असमय मौतों का सबसे बड़ा कारण बना हुआ है। 
 
 
 
इस अध्ययन रिपोर्ट के एक सह लेखक और क्वींसलैंड यूनिवर्सिटी के प्रोफेसर एलन लोपेज का कहना है कि अध्ययन के नतीजे हैरान करने वाले हैं। एलन के अनुसार उन्होंने सभी प्रमाण देखे और कुपोषण के सभी प्रभावों पर नजर डाली।
 
 
 
खासतौर से बच्चों के बीच किए गए सर्वे में पाया गया है कि पिछले दो दशकों के दौरान कुपोषण का प्रभाव घट रहा है। ये एक बड़ी गिरावट है। लेकिन मोटापे की वजह से होने वाली बीमारियां तेजी से बढ़ रही हैं।लोपेज के अनुसार मोटापा जरूरत से ज्यादा खाने की वजह से बढ रहा है ।
 
 
ये सिर्फ अमीर देशों की समस्या नहीं है, पिछले दशकों में मोटापा लगातार बढ़ रहा हैं। हैरानी वाली बात ये भी है कि विकासशील देशों में भी मोटापा एक बड़ी चुनौती के रूप में सामने आ रहा है। 
 
 
 
सिर्फ अमीर नहीं, विकासशील देश भी परेशान
 
एलन के अनुसार मोटापा सिर्फ अमीर देशों में नहीं बल्कि विकासशील देशों में भी एक बड़ी समस्या बन रहा है। प्रोफेसर एलन लोपेज कहते हैं कि सिर्फ अमीर देशों की समस्या नहीं है, हमने देखा कि पिछले दशकों में मोटापा लगातार बढ़ रहा है। हमारे लिए हैरानी वाली बात ये है कि विकासशील देशों में भी मोटापा चुनौती बन रहा है।  बेशक वहां ये समस्या अमीर देशों जितनी गंभीर नहीं है। लेकिन लगातार बढ़ रही है।
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